अभिकारक और उत्पाद कक्षा 7 से आप क्या समझते हैं? - abhikaarak aur utpaad kaksha 7 se aap kya samajhate hain?

अभिकारक और उत्पाद कक्षा 7 से आप क्या समझते हैं? - abhikaarak aur utpaad kaksha 7 se aap kya samajhate hain?

  • BY:RF Temre
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कई बार रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारकों की उतनी मात्रा उपस्थित नहीं रहती है। जितनी मात्रा संतुलित अभिक्रिया के लिए आवश्यक है। ऐसी स्थितियों में एक अभिकारक की मात्रा दूसरे अभिकारक की मात्रा से अधिक होती है। अतः वे अभिकारक (अभिकर्मक) जो अभिक्रिया में प्रस्तुत हो जाते हैं तथा उत्पाद की मात्रा को सीमित करते हैं, सीमांत अभिकर्मक कहलाते हैं तथा ऐसे अभिकारक जो पूर्णतः प्रस्तुत नहीं होते हैं, बहु-मात्रा अभिकर्मक कहलाते हैं।
उदाहरण- हाइड्रोजन के दहन से H2O का बनना।
उपर्युक्त अभिक्रिया में H2 के दो मोल (अणु) के पूर्ण दहन के लिए केवल O2 के 1 मोल की आवश्यकता है। अतः H2O सीमांत अभिकर्मक है, क्योंकि H2 की प्रयुक्त मात्रा ही उत्पाद की मात्रा निर्धारित करती है।

Sometimes chemical reactions don't have the same amount of reactants. The amount required for a balanced reaction. In such situations the amount of one reactant is greater than the amount of the other reactant. Therefore, those reactants which are present in the reaction and limit the amount of product are called marginal reagent and the reactants which are not completely present are called multi-volume reagents are called.
Example- Combustion of hydrogen to form H2O.
In the above reaction only 1 mole of O2 is required for complete combustion of two moles (molecule) of H2. Hence H2O is the marginal reagent, because the amount of H2 used determines the amount of product.

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मेथेन के पूर्ण दहन का रासायनिक समीकरण निम्न है-
CH4 + 2 O2 = CO2 + 2 H2O
एक मोल मेथेन के पूर्ण दहन से दो मोल जल उत्पन्न होता है। अर्थात् 16 ग्राम मेथेन (एक मोल) के पूर्ण दहन से 36 ग्राम (2 मोल) जल उत्पन्न होगा।

The chemical equation of complete combustion of methane is-
CH4 + 2 O2 = CO2 + 2 H2O
Complete combustion of one mole of methane produces two moles of water. That is, the complete combustion of 16 grams of methane (1 mole) will produce 36 grams (2 moles) of water.

CH4 + 2 O2 = CO2 + 2 H2O
उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है कि एक मोल CO2 गैस (44 ग्राम) 1 मोल मेथेन (16 ग्राम) गैस से प्राप्त होती है। इसलिए 22 ग्राम CO2 गैस 0.5 मोल मेथेन गैस से प्राप्त होती है।

CH4 + 2 O2 = CO2 + 2 H2O
It is clear from the above equation that one mole of CO2 gas (44 g) is obtained from 1 mole of methane (16 g) gas. Therefore 22 grams of CO2 gas is obtained from 0.5 mol of methane gas.

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आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों / विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
RF Temre
infosrf.com

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
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अभिकारक यह विज्ञान से संबंधित शब्द है। रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को अभिकारक कहते हैं यह रासायनिक समीकरण में तीर के चिन्ह के बायीं आेर लिखा जाता है। दो या दो से अधिक अभीकारकों के बीच धन(+) का चिन्ह होता है। अभीकारकों से मिलकर उत्पाद बनते हैं। इसका उदाहरण रासायनिक समीकरण में यह है, C+O^2=CO2 । यहां पर C तथा O2 एक अभिकारक है।

अभिकारक और उत्पाद से आप क्या समझते हैं?

अभिकारकों तथा उत्पादों के गैस, द्रव, जलीय तथा ठोस अवस्थाओं को क्रमश: (g), (1), (aq) तथा (s) से दर्शाया जाता है। अभिकारक या उत्पाद जब जल में घोल के रूप में उपस्थित होते हैं तब हम (aq) लिखते हैं। ध्यान दीजिए समीकरण ( 1.10 ) में H, O के साथ (g) चिह्न का उपयोग किया गया है।

अभिकारक और अभिक्रिया में क्या अंतर है?

अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है।

अवक्षेपण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं उदाहरण देकर समझाइए?

उत्तर- जब दो विलयनों को मिलाया जाता है और उनकी अभिक्रिया से श्वेत रंग के एक पदार्थ का निर्माण होता है जो जल में अविलेय है, इस अविलेय पदार्थ को अवक्षेप कहते हैं। जिस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता है उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। Ba2+ तथा SO42- की अभिक्रिया से BaSO4 के अवक्षेप का निर्माण होता है।

अभिकारक कितने प्रकार के होते हैं?

यह तीन प्रकार की होती है: उष्मीय वियोजन जो ऊष्मा के द्वारा होती है, विद्युत वियोजन जिसमें ऊष्मा विद्युत के रूप में प्रदान की जाती है, प्रकाशीय वियोजन जिसमें ऊष्मा प्रकाश के द्वारा प्रदान की जाती हैं.